तबादला नीति की धज्जियां उड़ाकर सीएम योगी का मजाक बना रहें होमगार्ड अफसर
मुख्यालय पर अफसरों को चढ़ावा देने के बाद बोलते हैं क्लर्क-मंत्रियों के दम नाही की हमका हटा पाये…
मुख्यालय पर कौन अफसर है जो वसूलीबाज क्लर्कों बना मसीहा
तबादला नीति की धज्जियां उड़ाने वाले कर्मचारी:
रवीन्द्र यादव-क्लर्क,वाराणसी 12 वर्ष से तैनात, सीमा पाल-क्लर्क,वाराणसी 2003 से तैनात ,सरोज पाण्डेय क्लर्क-वाराणसी12 वर्ष से तैनात,हरिशंकर सिंह हेड क्लर्क-सोनभद्र में 11 वर्ष से तैनात, रमेश सिंह-प्रयागराज में 20 वर्ष से तैनात, अर्जुन सिंह-बरेली 20 वर्ष से तैनात, कौशल राजा-अयोध्या में 20 वर्ष से तैनात हैं

शुभम यादव
Corruption in the Home Guards Department: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त निर्देश है कि तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही जगह अधिकारियों व कर्मचारियों को तबादला नीति के तहत ट्रांसफर किया जाये। इसमें किसी तरह की कोताही ना बरती जाये,लेकिन…। होमगार्ड विभाग में आज नहीं वर्षों से तबादला नीति की धकाधक धज्जियां उड़ायी जा रही है और शासन में बैठे अफसर भी धृतराष्टï्र बनकर अंखिया मटका रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कमांडेंट ने बताया कि होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति को विभाग से कोई लेना-देना नहीं,उन्हे तो ट्रांसफर पॉलिसी में अपना सिस्टम बनाकर चलना है। मुख्यालय के कुछ अफसर हैं जो नियमों को तोडऩे और वसूली बाज क्लर्कों को खुलकर संरक्षण दे रहे हैं। यही वजह है कि भ्रष्टïाचार के आकंठ में डूबे प्रमोटी कमांडेंट इन क्लर्कों के जरीये प्रति माह लाखों रुपये की वसूली कर मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री की तौहीन कर रहे हैं। भ्रष्टïाचार की कहानी शुरु करते हैं वाराणसी से जहां के सांसद कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

चर्चा है कि प्रदेश के सभी जनपदों में तैनात क्लर्कों की काली कमाई और वर्षों से तैनात होने की जानकारी मुख्यालय के अफसरों को है लेकिन देखना है इनके स्तर से कोई कार्रवाई होती है या नहीं? तबादला नीति आते ही होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति और मुख्यालय पर तैनात अफसरों की बांछे खिल जाती है और चेहरे पर नूर दिखने लगता है। मंत्री जी तो अपने क्षेत्र में ही रहते हैं, उन्हें विभाग से ज्यादा वास्ता नहीं है क्योंकि सिस्टम बना हुआ है और ऊपर से कभी कभार छौंका मिल जाता है। इस समय लखनऊ के सरकारी आवास पर उनका ज्यादा समय बीत रहा है क्योंकि जनपदों से आने वाले प्रमोटी कमांडेंट बड़े जिलों के लिये और बड़े जिलों में तैनात उनके खास कमांडेंट अपनी बचाने के लिये ले-दे कर आ रहे हैं। आवाजाही में जो पिछे रह रहे हैं वे सीधे उनके पीए से सटिया कर मनचाही तैनाती का जुआ खेल रहे हैं। जहां तक मुख्यालय पर तैनात बड़े अफसरों की बात करें तो उनके जुबान पर ‘ईमानदारी’ का भजन निकल रहा है लेकिन कंबल ओढ़कर घी पी रहे हैं।

नाम न छापने की शर्त पर प्रमोटी कमांडेंट ने बताया कि वाराणसी जिला कमांडेंट कार्यालय पर तैनात क्लर्क रवीन्द्र यादव का इस विभाग में 16 जुलाई 2014 में पोस्टिंग हुयी थी। रवीन्द्र यादव यहां पर कमांडेंट के सभी ऐसे काम करते हैं जहां से दो नंबर की ऊपरी कमाई आती है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में तैनात सभी कमांडेंट को 3 प्रतिशत होमगार्डों की ड्यूटी बदलने का अधिकार है। इसी तरह वाराणसी के प्रमोटी कमांडेंट बृजेश मिश्रा के निर्देश पर 3 प्रतिशत होमगार्डों को ड्यूटी बदलने के नाम पर सभी से अवैध वसूली करने का काम क्लर्क रवीन्द्र यादव ही करता है। नियमत: माह के आखिर में दो दिन पूर्व ड्यूटी बदलने का काम कर लिया जाता है लेकिन रवीन्द्र यादव आखिरी दिन रात 10 बजे से डयूटी बदलने की सूची बनाना शुरु करता है जो देर रात तक चलता रहता है। इस दौरान जो जवान उसकी मनचाही रकम पर मान जाता है, उसे वहां तैनात करता है वर्ना उठाकर दूर फेंक देता है।
इसी तरह मृतक आश्रितों कौ नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों के लेन-देन का सारा काम यही करता है। एक तरह से यकह सकते हैं कि रवीन्द्र यादव प्रमोटी कमांडेंट का दाहिना हांथ है और नियम विरुद्ध सारा काम यही करता चला आ रहा है। इसकी जानकारी मुख्यालय पर तैनात अफसरों को अच्छी तरह से लेकिन कमांडेंट ने कुछ ऐसा सिस्टम बना रखा है कि भ्रष्टïाचार करने और तबादला नीति को चुनौती देने वाले क्लर्क रवीन्द्र चौधरी की कुर्सी को कोई सरकार नहीं सकता है। यही हाल ऊपर दिये गये सभी कर्मचारियों पर भी लागू होता है। अधिकारियों ने बताया कि क्लर्क मुख्यालय से लौटने के बाद कुछ क्लर्क तो यहां तक दम भर रहे हैं कि सेटिंग हो गयी है अब मंत्री जी भी कुछ नहीं…कर सकते हैं ?












