हाईकोर्ट के आदेश पर ललित तिवारी ने ली पार्षद की शपथ, महापौर के अधिकार सीज

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संवाददाता, लखनऊ। महापौर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारी सीज किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में फैजुल्लागंज वार्ड (तृतीय) से उपविजेता रहे ललित किशोर तिवारी को पार्षद की शपथ दिलाई गई। सुबह नौ बजे महापौर ने शपथ दिलाई। वह सपा उम्मीदवावर थे। यह मामला दिसंबर में अदालत में चल रहा था।चुनाव न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा था कि मौजूदा पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक जानकारी देनी थी, जो नहीं दी गई, यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है, जिसके कारण उनका निर्वाचन निरस्त होने योग्य है और उपविजेता ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रदीप कुमार शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी, लेकिन 20 मई को उनके अधिवक्ता द्वारा याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज हो गई थी।

ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किए जाने के आदेश के पांच महीने बाद भी शपथ नहीं दिलाने के मामले में 21 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नाराजगी जताई थी और महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए थे और यहां तक टिप्पणी की थी कि महापौर को अनुपस्थित मानकर नगर निगम के कामकाज को चलाया जाए।कोर्ट ने यहां तक कहा था कि जब तक याची ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिला दी जाती, ये अधिकार सीज रहेंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 मई तय की थी। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की पीठ ने याची ललित तिवारी उर्फ ललित किशोर तिवारी की याचिका पर पारित किया था।

21 मई को सुनवाई के समय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व डीएम की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेशिया व नगर आयुक्त व महापौर की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान से पूछा कि क्या याची को शपथ दिला दी गई है तो उनकी ओर से इन्कार करने पर पीठ ने इस स्थिति पर काफी नाराजगी जताई और महापौर के खिलाफ काफी तीखी टिप्पणियां कीं और उनके वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने का आदेश पारित कर दिया था।

यह है मामला

फैजुल्लागंज वार्ड तृतीय में प्रदीप कुमार शुक्ला भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी थे और वादी ललित तिवारी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े। चुनाव में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4972 मत प्राप्त हुए और वादी ललित तिवारी को 3298 मत प्राप्त हुए थे।19 दिसंबर 2025 को चुनाव न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा था कि प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक जानकारी देनी थी जो नहीं दी गई, यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है जिसके कारण उनका निर्वाचन निरस्त होने योग्य है और उपविजेता ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया था।

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