शेखर यादव लखनऊ। बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल पर भरोसा जताया है। बदायूं में पूर्व सांसद सलीम शेरवानी के सपा से त्यागपत्र देने के बाद बदले राजनीतिक समीकरण के कारण सपा की डगमगा रही नैया को पार लगाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। वे बदायूं में सपा के खेवनहार बन पाते हैं या नहीं यह तो चुनाव में ही पता चलेगा किंतु शिवपाल के यहां से उतरने से चुनाव रोचक जरूर हो जाएगा।
बता दें, सपा ने मंगलवार को पांच प्रत्याशियों की तीसरी सूची जारी की है। शिवपाल सिंह यादव अब बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव ने पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का टिकट काटकर चाचा को दे दिया है। धर्मेंद्र को आजमगढ़ व कन्नौज दोनों ही लोकसभा सीटों का प्रभारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि इनमें से किसी एक सीट पर धर्मेंद्र चुनाव लड़ सकते हैं। सपा ने जिन पांच टिकटों की घोषणा की उसमें अल्पसंख्यक, लोधी, मुस्लिम, यादव व वैश्य समाज के एक-एक प्रत्याशी शामिल हैं।
सपा के अब तक कुल 31 प्रत्याशी मैदान में आ गए हैं। सपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से इस बार पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल को मैदान में उतारा है। अखिलेश ने 30 जनवरी को इन्हें प्रभारी बनाया, अब टिकट दे दिया है।अखिलेश ने पहले बदायूं से धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा था, किंतु पूर्व सांसद सलीम शेरवानी के इस्तीफा देने से सपा की राजनीतिक चौसर बिगड़ गई है। शेरवानी यहां से चुनाव लड़ सकते हैं।
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