अपराधों को रोकने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है :डी.जी. बी.के.मौर्य

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. जब अपराधियों को लगेगा की अपराध करना घाटे का सौदा है तभी अपराध कम होगा : डी.जी. बी.के.मौर्य जेल मंत्री

. धर्मवीर प्रजापति ने हजारों बंदियों की जमानत अदाकर उन्हें खुली हवा में सांस लेने का मौका दिया जेल में बंद   

 .अपराधियों की मानसिक स्थिति ठीक करने के लिये काउंसलिंग भी करनी चाहिये : प्रो. राकेश द्विवेदी

     

    अक्षत श्री.

लखनऊ। अपराधी द्वारा किये गये अपराध को जब तक घाटे का सौदा न बना दिया जाये, तब तक अपराध कम नहीं हो सकता। अपराधी को यह महसूस होना चाहिये की उसने अपराध किया है जिससे उसे आत्मग्लानि हो और वह अपराध न करे। यह विचार उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल होमगार्ड एवं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बी.के. मौर्य ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में ‘कारागार संस्कृति में सुधार मानव केंद्रित डिजाइन के माध्यम से पुनर्वास को बढ़ावा देना’ विषयक संपन्न हुये एक सत्र में दिये। उन्होंने कहा कि अपराध को रोकने में विश्वविद्यालयों कि बड़ी अहम् भूमिका है। यहां बच्चे समाज के जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ एक उत्कृष्ट व्यक्ति भी बनते हैं।

उन्होंने समाज कार्य विभाग में चल रहे ‘परास्नातक स्तर के क्रिमिनॉलिजी एंड क्रिमिनल जस्टिस एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स’ का जिक्र करते हुये कहा कि इस कोर्स में पढ़ रहे शिक्षकों और छात्रों की महती भूमिका जेल सुधार में हो सकती है। क्योंकि यहां शिक्षण के साथ अपराध सुधार का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस कोर्स के छात्र और शिक्षक अपने अनुभव द्वारा निश्चय ही सजा पूर्ण होने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास के लिये एक कार्यक्रम भी बना सकेंगे। विदेशों में अपने कुछ अनुभवों को साझा करते हुये डी.जी. बी.के.मौर्य हॉल में मौजूद छात्रों को बताया कि जब वे सिंगापुर में थे तो उन्होंने एक माह तक जेल पर काम किया और देखा कि वहां का सिस्टम बेहतर था। मैंने जाना कि जरुरी नहीं कि जो व्यक्ति जेल जा रहा है वो अपराधी है और जो बाहर है वो ठीक हो। हमेशा इस पर विचार-विमर्श होते रहना चाहिये। जेलों में कै दियों की बढ़ती संख्या पर कहा कि मैनेजमेंट में देरी होने की वजह से ये सब हो रहा है तभी तो उत्तर प्रदेश की जेलों में एक लाख कैदी हैं जिनमें से 70 प्रतिशत बंदी अंडर ट्रायल हैं। इन बंदियों को मालूम ही नहीं कि वे निर्दोष हैं या दोषी ? ठीक इसी तरह लगभग 30 प्रतिशत बंदी उम्र ज्यादा होने की वजह से जेलों में सजायाफ्ता हैं।

जिलों में तैनाती के दौरान का जिक्र करते हुये डीजी ने कहा कि यूपी में जब पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का कार्यकाल था,उस वक्त मैं एसएसपी,बरेली था। मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग थी और सुझाव मांगा गया कि आखिर क्राईम कंट्रोल कैसे किया जा सकता है? इस पर मैंने अपने सुझाव रखा। अपराधी अपराध तभी छोड़ेगा जब उसे मालूम चल जाये कि ये घाटे का सौदा है। सभी जेलों के बाहर एक पुलिस चौकी बनायी जाये और नजर रखी जाये कि किस अपराधी से कौन मिलने जा रहा है और उसकी जमानत कौन ले रहा है…। रजिस्टर में सभी का पूरा ब्यौरा दर्ज किया जाये और उन्हें चिन्हित किया जाये। मेरा सुझाव मुख्यमंत्री को जंचा और उन्होंने तत्काल जेलों के बाहर चौकी बनाने का निर्देश जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े अपराधियों की निगरानी हमेशा रखना जरूरी है।

डीजी ने जेल,होमगार्ड राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति के कार्यशैली की प्रशंसा करते हुये कहा कि जेल मंत्री ने उत्तर प्रदेश की जेलों में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर ऐसे बंदियों को चिन्हित कराया जिनकी जमानत लेने वाला कोई नहीं है। मामूली रकम अदा न कर पाने की वजह से हजारों की संख्या में बंदी जेल की सलाखों के पीछे पड़े हैं। जेल मंत्री ने सामाजिक संस्थाओं की मदद से मामूली रकम न अदा कर पाने वाले हजारों बंदियों को जेल से बाहर निकलवाया और जेल के अंदर का पूरा माहौल सुधारने का काम किया। जेलों में बंदी सुबह ‘गायत्री मंत्र’ और ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करते हैं और अपराध ना करने की कसमें खा रहे हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ सत्र का प्रारंभ हुआ जिसमे अपने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय के मुख्य कुलानुशासक एवं समाज कार्य के विभागाध्यक्ष प्रो.राकेश द्विवेदी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि बी. के. मौर्य को हम लोग अक्सर टीवी में देखते थे लेकिन आज वो हमारे समक्ष उपस्थित हैं। ये हमारे विभाग के लिये अत्यंत हर्ष की बात है। उन्होंने जेल में बंद अपराधियों के विषय पर सुधारात्मक प्रणाली पर जोर देते हुये कहा कि अपराधियों की मानसिक स्थिति पर काम करने के साथ समय- समय पर उनकी काउंसलिंग भी करनी चाहिये ताकि उन्हें फि र से स्वस्थ रूप से समाज की मुख्यधारा में जोड़ा जा सके।

कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक डॉ. रजनीश कुमार यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। प्रो. राज कुमार सिंह, प्रो. डी. के. सिंह, प्रो. रूपेश कुमार, डॉ. रमेश त्रिपाठी, डॉ. अन्विता वर्मा, डॉ. शिखा सिंह, डॉ.गरिमा सिंह सहित विभाग के कर्मचारी, एन.सी.सी. के कडेट्स के साथ छात्र एवं छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओमेन्द कुमार यादव द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम की रुपरेखा कुलदीप भारत ने की।

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