मिरजापुर के ‘तानाशाह’ कमांडेंट की वजह से वोट डालने से ‘वंचित’ रह गये दर्जनों कर्मचारी

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कमांडेट बी.के.सिंह ने मतदान के दिन ऑफिस खोला,दर्जनों कर्मचारी नहीं दे पाये वोट

चुनाव आयोग,शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुये कमांडेंट बी.के.सिंह ने दर्जनों कर्मचारियों को नहीं देने दिया वोट

  संजय पुरबिया

लखनऊ। देश में पावन पर्व के रुप में लोकसभा चुनाव होता है। मतदान के दिन सभी सरकारी विभागों, प्रतिष्ठानो में इसलिये अवकाश घोषित किया जाता है ताकि हर कोई जाकर अपने मतों का प्रयोग कर ऐसा प्रतिनिधि चुने जो देश के विकास एवं जनहित के कार्यों को करने में कारगर साबित हो। लेकिन, मिरजापुर में होमगार्ड विभाग के कमांडेंट बी.के.सिंह मतदान के दिन भी कार्यालय खोला ताकि वहां के स्थानीय कर्मचारी मतदान ना कर पाये। यहां तैनात अधिसंख्य रनर एवं क्लर्क अपने मतों का प्रयोग नहीं कर पाये हैं। इस बात को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि एक मत से सरकार बनती और गिरती है। यहां देश के प्रधानमंत्री को चुनना है लेकिन अफसोस हमलोग लोकसभा के महावर्प में इससे वंचित रह गये हैं। वहीं कमांडेंट बी.के.सिंह अपना मतदान करने के लिये लखनऊ गये और मिरजापुर से ड्यूटी पर गये होमगार्डों की व्यवस्था का ध्यान ना देकर वर्दी में अपनी पत्नी के साथ रील बनाने में जुटे थे। ऐसा कर कमांडेंट ने चुनाव आयोग और प्रमुख सचिव,गृह के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का काम किया है। इस विभाग के मंत्री धर्मवीर प्रजापति पूरे चुनाव में दिन-रात पसीना बहाकर अपनी पार्टी के प्रत्याशियों की हौसला-अफजाई करते दिखें वहीं मनबढ़ कमांडेंट ने नियमों को तोड़ ये साबित कर दिया कि उसे ना तो शासन का डर है और ना ही आयोग का…।

1 जून 2024 को लोकसभा चुनाव का आखिरी चरण का मतदान था। वाराणसी,मिरजापुर,बलिया,चंदौली,सोनभद्र में मतदान था। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी होने की वजह से मतदाताओं में जोश था लेकिन मिरजापुर के होमगार्ड विभाग में तैनात रनर व क्लर्क अपने मतों का प्रयोग नहीं कर पाये। मिरजापुर के रहने वाले कर्मचारियों ने बताया कि कमांडेंट ने अवकाश के दिन यानि 1 जून को मतदान के दिन कार्यालय खोलकर अपनी तानाशाही दिखायी और हमलोग अपने कीमती मतों का प्रयोग नहीं कर पाये। कर्मचारियों ने बताया कि खुद कमांडेंट बी.के.सिंह अपना वोट डालने लखनऊ गये और वहां भी पैजामा-कुर्ता पहनकर वोट डाले और सेल्फी डाले कि पहले मतदान फिर जलपान…। जब कमांडेंट डयूटी पर थे तो पायजामा-कुर्ता क्यों पहने थे ? मतदान से एक दिन पूर्व कमांडेंट रमाबाई रैली स्थल,लखनऊ में वर्दी पहनकर अपनी पत्नी के साथ रील बना रहे थे, उन्हें इससे कोई मतलब नहीं था कि मिरजापुर सहित अन्य जिलों से आये जवानों के खाने-पीने और रहने में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं हो रहा…। कर्मचारियों ने बताया कि कमांडेंट के खिलाफ अवैध वसूली करने,अपराधी को ड्यूटी पर लगाने सहित तमाम शिकायतें मुख्यालय भेजी जाती है लेकिन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। रील बनाने का शौख रखने वाले कमांडेंट का जुमला है कि इस विभाग में मेेरे खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जुर्रत तक नहीं कर सकता क्योंकि मैं सिस्टम को अपने हिसाब से चलाता हूं। कर्मचारियों की बातों में दम है क्योंकि द संडे व्यूज़ ने भी बी.के.सिंह के खिलाफ दस्तावेजों के साथ खबरें प्रकाशित की लेकिन शासन और मुख्यालय पर चरण वंदना कर इसने कार्रवाई अपने पक्ष में करा ली। लेकिन द संडे व्यूज़ भ्रष्टï अफसरों के लिये तब तक लिखता रहेगा जब तक कि उसे उसके अंजाम तक ना पहुुंचा दे…

अगले अंक में पढिय़े कमांडेंट बी.के.सिंह की क्रूरता ...

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