पहली उड़ान से लखनऊ आए जेवर के किसान हुए भावुक, बोले- सीएम ने निभाया हर वादा

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एयरपोर्ट आपकी तकदीर बदल देगा

वक्त सबका आता है

Jewar Airport news: जेवर एयरपोर्ट 15 जून से शुरू हो गया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए भूमि समर्पित करने वाले किसान सोमवार को लखनऊ पहुंचे। किसानों का मुख्यमंत्री आवास पर भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। किसानों ने मुख्यमंत्री से बातचीत की। मुख्यमंत्री को स्मृति चिह्न प्रदान किया और उनके प्रति आभार भी प्रकट किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि जेवर अब वह क्षेत्र बन गया है, जहां ‘कुबेर’ भी आना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हमारी कैबिनेट ने जेवर में एयरपोर्ट निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया, तो मैंने नोएडा के जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से कहा कि 100 दिन के भीतर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ हो जाए, लेकिन इस अवधि तक कार्रवाई प्रारंभ नहीं हुई। मैंने वहां पहुंचकर समीक्षा बैठक ली, तो पता चला कि कोई प्रगति नहीं हुई है। तब मैंने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में लगभग 100 किसानों के साथ बैठक की। मैंने कहा कि एयरपोर्ट बनाना है, तो किसानों ने जमीन देने से इनकार कर दिया। असमंजस की स्थिति थी। मैंने कहा कि हम यहां विकास करना चाहते हैं, फिर भी लोगों ने मना कर दिया। मैंने अनुरोध किया कि एक घंटे का समय है, सोचिए। यह एयरपोर्ट आपकी तकदीर बदल देगा।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मैंने बुजुर्गों से अनुरोध किया कि विकास का मॉडल क्या होता है, यह दिखाने का समय है। वक्त सबका आता है, कुछ बन जाते हैं और कुछ बिखर जाते हैं। जो अवसर का लाभ लेता है, इतिहास उसी का बनता है, जो मौके को गंवा देता है, वह अवसर से बिखर जाता है। आपने मुझ पर विश्वास किया, धीरेंद्र सिंह ने सहयोग किया। यीडा और उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग ने कार्रवाई को युद्धस्तर पर बढ़ाया, तो परिणाम यह रहा कि 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण पर कार्य शुरू हुआ। चार फेज में एयरपोर्ट बनेगा, पहले फेज की कार्रवाई संपन्न हुई।

 

योगी ने कहा कि आज बड़ी से बड़ी कंपनियां जेवर आना चाहती हैं। वहां अब ‘कुबेर’ भी आना चाहते हैं। जेवर एयरपोर्ट भारत का पहला कार्गो और एमआरओ केंद्र बनने जा रहा है। अन्न, फल, मत्स्य, सब्जी आदि पैदा करने वाला उत्तर प्रदेश का किसान यहां कार्गो से अपने उत्पादों को दुनिया में पहुंचाएगा। स्थानीय बाजार में उसे दाम भले कम मिले, लेकिन दुनिया के बाजार में कई गुना दाम मिलेगा। आम का दाम यहां अधिकतम 50 रुपये पहुंचेगा, लेकिन दुनिया के बाजार में 800 से 1000 रुपये किलो बिकता है। 200 रुपये प्रति किलो कार्गो खर्च जोड़ लें, तब भी किसान को 600 रुपये का लाभ मिलेगा। जिस किसान को यहां 10 रुपये प्रति किलो का लाभ नहीं मिल पा रहा, उसे 600 रुपये का लाभ मिलेगा तो वह समृद्ध बनेगा।

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