ख़बर का असर- सिंचाई विभाग के एक्सीयन हेमंत वर्मा के इशारे पर मिट्टी निकाल कर ‘गोकुल धाम’ को बेचते थे

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 सिंचाई अफसरों का फ्राड: नदी का सीना चीर मिट्टी निकालकर करोड़ों कमाने वाले माफियाओं पर चला शासन का बुलडोजर

द संडे व्यूज़ ने एक माह 20 मई को किया था खुलासा: सिंचाई विभाग के एक्सीयन हेमंत वर्मा नहर की मिटटी का कर रहें अवैध व्यापार

चीफ इंजीनियर के संरक्षण में सिंचाई और खनन अफसर कर रहे थे अवैध मिट्टी खनन का कारोबार

सिंचाई और खनन अफसरों की जुगलबंदी से नदी से 10 करोड़ से अधिक की मिटटी निकाल कर निजी प्लाटिंग को बेच दी

अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज, कई डंफर जब्त किये गये

संजय श्रीवास्तव

Irrigation officials’ fraud: राजधानी लखनऊ में ही सिंचाई और खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से नदी के एक हिस्से का पानी रोककर करोड़ों रुपए की मिट्टी अवैध रूप से बेच डाली गयी। सीधे तौर पर कहें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्ट व्यवस्था को रोकने के लिये की जा रही बैठकों को धता बताते हुये सिंचाई और खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की यह कारस्तानी सामने आ ही गयी। ‘द संडे व्यूज़’ ने एक माह पूर्व ही सोशल मीडिया और यू टयूब चैनल पर सिंचाई विभाग के एक्सीयन हेमंत वर्मा की मिलीभगत से दिन-रात चीनहट के निकट खारजा नहर से अवैघ मिट्टी खनन की खबर को प्रमुखता के साथ दिखाया गया था। चीफ इंजीनियर, सिंचाई से भी शिकायत की गयी लेकिन उन्होंने खनन माफियाओं के साथ पार्टनरशीप करने वाले एक्सीयन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आखिरकार आज जिला प्रशासन मुखर होकर अधिकारियों के नेतृत्व में छापा मारा और गोमती किनारे नो कंट्रक्शन जोन में करोड़ों रुपये के खनन के बाद अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गयी है।

इंदिरा डैम के पास खनन माफियाओं ने गोमती नदी पर 1400 एमएम के 36 सीमेंट पाइप लगाकर एक अवैध पुल का निर्माण करा दिया था। गोमती नदी को पार करने के लिये सिंचाई विभाग के एक्सीयन की शह पर खनन माफि या इसी पुल का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनका अवैध खनन का धंधा बेरोकटोक चल सके। सोशल मीडिया द संडे व्यूज पर समाचार आने के बाद खनन माफियाओं में हड़कम्प मचा हुआ था। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और गोमती नदी पर बने अवैध पुल को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। इसके तुरंत बाद ही पुकलेंड से पुल को हटाने की प्रक्रिया शुरु हुई। गोमती नदी से 36 सीमेंटेड पाइप हटते ही गोमती का पानी का प्रवाह भी बढ़ गया क्योंकि पाइप लगाने से पहले खनन माफि याओं ने नदी की सतह पर मिट्टी पर भी पाट रखी थी।

सिंचाई विभाग के एक अधिशासी अभियंता की छत्रछाया में यह कार्य चल रहा था। खनन माफियाओं ने गोमती नदी के तट पर अवैध खनन की सारी सीमाएं लांघ दी है। 50 डंफर और तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से दिन-रात गोमती तट पर अवैध खनन का काम हो रहा था। खनन माफिया गोमती नदी के तट से मिट्टी खोदकर नदी का खोखला कर रहे थे। जबकि सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण परियोजना इंदिरा डैम के आसपास नो- कंस्ट्रक्शन जोन घोषित है।

द संडे व्यूज़ ने एक माह पूर्व ही खुलासा किया था कि खनन माफियाओं के साथ इस खेल में सिंचाई विभाग के तीन बड़े अधिकारियों का भी हिस्सा है। एक्सीयन हेमंत वर्मा पार्टनरशीप में खुलेआम काम कर रहा था। बताया जाता है कि हर हफ्ते एम्सीयन की जेब में दो लाख रुपये महीना जाता था।

सिंचाई विभाग में जुड़े अधिकारी गोमती नदी से मिट्टी सप्लाई कुछ स्थानों पर चल रही प्लॉटिंग को भरने के लिये बेचते हैं। गोमती नदी के किनारे नो-कन्स्ट्रशन जोन में करोड़ों रुपये के खनन होने के बाद आज अज्ञात के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गई। सूचना के अनुसार जिला प्रशासन को अवैध खनन के पुख्ता सबूत मिले हैं। स्थानीय भाजपा नेता के अनुसार यहां एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर लगभग 10 करोड़ से भी अधिक का अवैध खनन हुआ है। जिला प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी यह आँकलन कर रहे थे कि अभी तक मिट्टी 10 करोड़ रुपए तक बेची गई है।इस पूरे प्रकरण पर सिंचाई विभाग के मंत्री और शासन में बैठे अधिकारी एकदम चुप्पी साधे बैठे हैं कि यह जानकारी कहीं मुख्यमंत्री तक न पहुंच जाये।

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