
मैथिली आनंद
Uttarakhand Cabinet Minister Rekha Arya News : करीब 22 साल के वैवाहिक रिश्ते में ऐसा भूचाल आया कि मामला पुलिस, एसआईटी और हाईकोर्ट तक पहुंच गया। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने ही पति पर घरेलू उत्पीड़न, धोखाधड़ी, जातिसूचक टिप्पणी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए। दूसरी तरफ गिरधारी लाल साहू ने आरोपों को नकारते हुए पत्नी पर ही सवाल खड़े किए। अब 7 नवंबर को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आखिर इस पूरे विवाद की कहानी क्या है ? उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा के केंद्र में है,जिसने सत्ता,परिवार, वैवाहिक रिश्तों और कानून के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला है प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी का।जिस रिश्ते की शुरुआत वर्ष 2004 में विवाह के साथ हुई थी, वह आज गंभीर आपराधिक आरोपों और पुलिस कार्रवाई के बीच खड़ा है।

इस कहानी में केवल पति-पत्नी के बीच विवाद नहीं है, बल्कि इसमें कथित घरेलू हिंसा, दूसरी शादी की जानकारी छिपाने, कंपनियों में निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर करने और हत्या की साजिश जैसे आरोप भी शामिल हैं। मामला तब और सुर्खियों में आ गया, जब खुद एक मंत्री ने सार्वजनिक रूप से अपने पति के खिलाफ आवाज उठाई।
15 अक्टूबर: जब मंत्री ने पति के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा इस पूरे प्रकरण का बड़ा मोड़ 15 अक्टूबर 226 को आया। रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट कोतवाली में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि साहू ने विवाह के समय अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी उनसे छिपाई थी। रेखा आर्या के मुताबिक, वर्ष 2004 में विवाह के बाद उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली। मंत्री ने अपने पति पर मारपीट, गाली-गलौज, मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए। शिकायत में यह भी कहा गया कि उनके पति दूसरी महिला के साथ मिलकर उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे थे। इन आरोपों के साथ ही रेखा आर्या ने कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक कीं। इन रिकॉर्डिंग को लेकर दावा किया गया कि इनमें हत्या की साजिश से संबंधित बातचीत है। हालांकि, इन ऑडियो की प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण जांच और फोरेंसिक परीक्षण से ही हो सकता है।
कंपनियों से हटाने का आरोप:
विवाद का दूसरा बड़ा पहलू इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू चार कंपनियों में निदेशक पद से हटाए जाने का भी है। रेखा आर्या ने आरोप लगाया कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए उन्हें बिना जानकारी और सहमति के कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया गया। शिकायत के अनुसार, जिन कंपनियों में यह कथित हेरफेर हुआ, उनमें देवों के देव महादेव, बनखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। मंत्री का आरोप था कि उन्हें निदेशक पद से हटाने के बाद उनके पति के भतीजे सतेंद्र राठौर को इन कंपनियों में निदेशक बना दिया गया। इस शिकायत ने मामले को केवल घरेलू विवाद तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसमें कथित वित्तीय अनियमितता और दस्तावेजों की जालसाजी का पहलू भी जुड़ गया।
पति ने भी खोला मोर्चा, पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप
रेखा आर्या की शिकायत के बाद गिरधारी लाल साहू की ओर से भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया गया। उन्होंने पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया और खुद को निर्दोष बताया। साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रेखा आर्या की कथित 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति की जांच कराने की मांग भी की। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके खिलाफ सामने आई ऑडियो रिकॉर्डिंग एआई के माध्यम से तैयार की गई है और परिवार को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपनी पत्नी से मुकदमा वापस लेने की अपील भी की थी। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। एक तरफ मंत्री अपने साथ कथित उत्पीड़न और जान के खतरे की बात कर रही थीं, तो दूसरी तरफ उनके पति इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे थे। यहां यह समझना जरूरी है कि दोनों पक्षों के आरोपों का अंतिम सच जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा। किसी भी आरोप को अदालत में साबित होने से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। एसआईटी का गठन और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया।
एसपी ग्रामीण जया बलोनी के पर्यवेक्षण में नौ सदस्यीय टीम को जांच की जिम्मेदारी दी गई। पुलिस ने मामले से जुड़े ऑडियो रिकॉर्डिंग अपने कब्जे में लिए और गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों और कथित हस्ताक्षरों की जांच शुरू की गई। गिरधारी लाल साहू ने गिरफ्तारी से राहत पाने और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया। 19 अक्टूबर को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई। इसके बाद 4 नवंबर को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की उनकी याचिका भी खारिज कर दी। हाईकोर्ट में साहू की ओर से यह दलील दी गई कि दोनों का विवाह जुलाई 2004 में हुआ था और करीब 22 वर्षों के वैवाहिक संबंध को आपराधिक मामले का रूप दिया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार और रेखा आर्या की ओर से आरोपों को गंभीर बताते हुए याचिका का विरोध किया गया। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना और कहा कि उन्हें महज वैवाहिक विवाद बताकर नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, कथित दस्तावेजों और ऑडियो की वास्तविकता का परीक्षण जांच के दौरान होना बाकी है।
7 नवंबर: पुलिस ने गिरधारी लाल साहू को किया गिरफ्तार
करीब तीन सप्ताह तक पुलिस की तलाश के बाद आखिरकार 7 नवंबर 2026 को इस मामले में बड़ी कार्रवाई हुई। देहरादून पुलिस की नौ सदस्यीय एसआईटी ने गिरधारी लाल साहू को उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया। उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को बरेली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों की तलाश में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को उनकी लोकेशन का पता चला। इसके बाद 6 नवंबर को गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने बताया कि जांच के दौरान कथित फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार कर मंत्री को चार कंपनियों के निदेशक पद से हटाने में गिरधारी लाल और उनके भतीजे की भूमिका सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, सतेंद्र राठौर को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। एसएसपी के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर एक्ट सहित करीब 44 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई की जा सकती है। गिरफ्तारी के बाद साहू का बयान भी चर्चा में गिरफ्तारी के बाद मीडिया के सामने गिरधारी लाल साहू का एक बयान भी सामने आया, जिसने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर मेरी पत्नी मेरे जेल जाने से खुश हैं तो यही सही।’ साथ ही उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। उनका यह बयान मीडिया में तेजी से प्रसारित हुआ। एक तरफ पत्नी की शिकायत पर गिरफ्तारी हुई, तो दूसरी तरफ आरोपी पति अब भी अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बता रहा है।
इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक कैबिनेट मंत्री को अपने ही पति के खिलाफ पुलिस तक क्यों पहुंचना पड़ा ? क्या वाकई कंपनियों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा हुआ ? क्या सामने आए ऑडियो में किए गए दावे सही हैं ? और क्या इस पूरे मामले में कोई तीसरा पक्ष भी शामिल है ? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। राजनीति, परिवार और कानून के बीच उलझा मामला रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू का प्रकरण कई मायनों में असाधारण है। आमतौर पर घरेलू विवाद घर की चारदीवारी तक सीमित रहते हैं, लेकिन यहां मामला प्रदेश की एक जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री और उनके पति के बीच है। आरोपों की गंभीरता, सार्वजनिक वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कंपनियों के दस्तावेज और अब गिरफ्तारी ने इसे प्रदेश की बड़ी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण सवाल महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों का भी है। यदि किसी महिला के साथ घरेलू हिंसा या उत्पीड़न होता है, तो उसका पद और राजनीतिक पहचान उसके न्याय पाने के अधिकार को कम या ज्यादा नहीं कर सकते। वहीं, किसी भी आरोपी को निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है। अब निगाहें पुलिस की आगे की जांच, कथित फर्जी दस्तावेजों की फोरेंसिक पड़ताल, ऑडियो रिकॉर्डिंग की सत्यता और अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस रिश्ते की शुरुआत विश्वास और साथ निभाने के वादे के साथ हुई थी, वह आखिर आरोपों, कानूनी लड़ाई और गिरफ्तारी तक कैसे पहुंच गया ? इस सवाल का जवाब केवल राजनीतिक बयानबाजी में नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और न्यायालय के फैसले में छिपा है।












