फालोअप: उद्यान निदेशक ने भ्रष्टाचार करने वाली डॉ.सीमा राणा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की कार्रवाई ? निदेशक ने क्यों साध रखी है चुप्पी…

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डॉ.सीमा राणा ने शिकायतकर्ताओं के नाम का फर्जी समझौता पत्र भेजा ,शिकायतकर्ता कहिन,हमलोगों ने की है जांच की मांग,दबाव में नहीं आयेंगे

‘द संडे व्यूज़’ से बातचीत में दोनों गवाहों ने दिया बयान : सीमा हमलोगों के नाम से फर्जी समझौता पत्र दी है, दम है तो सामने आकर बात करे…

सवाल: जब निदेशक ही भ्रष्टाचार के आकंठ में नहाया हो तो कैसे होगी कार्रवाई ?

सवाल: जब संयुक्त निदेशक भानू प्रकाश कर रहे हैं जांच तो क्यों डर रही हैं सीमा राणा ?

संयुक्त निदेशक भानू प्रकाश की गिनती दूध का दूध पानी का पानी करने वाले अधिकारियों में होती है

 संजय पुरबिया

लखनऊ। बुजुर्गो ने सही कहा है कि चोर चोरी से जाये,सीनाजोरी से नहीं…। एक और कहावत है कि एक चोरी छिपाने के लिये लोग गल्ती पर गल्ती करते जाते हैं और पूरी तरह से चोरी में मकडज़ाल की तरह उलझ जाते हैं…। उद्यान विभाग में भी कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिल रहा है। द संडे व्यूज़ ने उप-निदेशक पंकज शुक्ला और उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह राणा के खिलाफ हल्ला बोल जारी किया है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कहानियों का खुलासा जब किया तो विभाग में ही नहीं,सूबे में हड़कम्प मचा हुआ है। मामले को सिर्फ शासन ने गंभीरता से लिया और विशेष सचिव ने जांच बिठा दी और इसकी जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को सौंपी,जिसकी गिनती निष्पक्ष जांच के लिये की जाती है। जांच संयुक्त निदेशक भानू प्रकाश राम को सौंप दी गयी। उन्होंने जब सीमा सिंह राणा से सिलसिलेवार जवाब मांगना शुरू किया तो उनके होश फाख्ता हो गये। जांच अधिकारी ने एक हफ्ते के अंदर शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाये गये गंभीर आरोप पर दस्तावेज मांगे तो सीमा राणा की बोलती बंद हो गयी। अब देखिये,सीमा राणा का फ्राड…। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पहले तो निर्धारित अवधि में उन्होंने जांच अधिकारी को कोई दस्तावेज नहीं सौंपा। उसके बाद सीमा राणा ने दोनों शिकायतकर्ता भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार यादव एवं श्रीमती अनिता देवी के नाम से फर्जी समझौता पत्र बनाकर मुख्यालय पर निदेशक तक भेज दिया। फर्जी समझौता पत्र में उन्होंने लिखा है कि शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि वे अपनी शिकायत को वापस ले रहे हैं। ऐसा को प्रकरण नहीं है। द संडे व्यूज़ ने जब शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव एवं श्रीमती अनिता देवी से बात की तो जवाब मिला कि’ नहीं हमलोगों ने कोई समझौता नहीं किया है’। जब हमने शिकायत की है तो समझौता क्यों करेंगे। विभाग इनके भ्रष्टाचार  की जांच करें यदि हमलोग गलत साबित होते हैं तो हमलोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाये और नहीं तो फिर सीमा राणा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये। हां,मनोज कुमार यादव ने इतना जरूर कहा कि उनके ऊपर सीमा राणा अपने पति और प्रतापगढ़ के पदाधिकारियों से दबाव डलवा रहे हैं लेकिन मैं दबने वाला नहीं हूं। द संडे व्यूज़ के पास दोनों शिकायतकर्ताओं के बयान हैं। खैर,बता दें कि को द संडे व्यूज़ ने शीर्षक प्रकाशित किया था। खबर में खुलासा कुुछ इस तरह किया गया था…।

 

 

खैर,बता दें कि को द संडे व्यूज़ ने 28 जुलाई को पार्ट 1  शीर्षक उद्यान विभाग में घोटाला 6 करोड़ का : पंकज शुक्ला और डॉ.सीमा सिंह राणा की जोड़ी ने बनाया घोटाले का रिकार्ड में प्रकाशित किया था कि… पंकज शुक्ला ने फलदार वृक्षारोपण कार्यक्रम अंतर्गत धनराशि1500000 रुपये का आहरण कर घोटाला किया है। जबकि राजकीय पौधशाला मुख्यालय में सिर्फ एक हजार ही पौधे तैयार किये गये हैं। आहरण किये गये धनराशि के सापेक्ष राजकीय पौधशाला मुख्यालय में तैयार किये गये पौधे का आकस्मिक जांच करायी जाये तो घोटाले का खुलासा हो जायेगा। इसी तरह,मिशन योजना में श्रीमती राम भोली पत्नी हीरालाल गुप्ता का पुत्र अजय कुमार गुप्ता,जो कार्यालय में ही कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर तैनात है। इसने प्रोजेक्ट बेस कार्यक्रम में पावर टिलर क्रय किये बिना सिंह इंटरप्राइजेज, लालगंज, अझारा, प्रतापगढ़ के नाम 3 फरवरी 2022 को फर्जी बिल संख्या 204 बनाकर 1,70240 रुपये कूटरचित तरीके से तैयार करके 75000 रुपये का भुगतान ले लिया। यदि तहसील प्रभारी सदर सत्यभान सिंह एवं सहायक उद्यान निरीक्षक से उक्त बिल के आधार पर संबंधित फर्म से सत्यापन करा ली जाये तो फर्जी बिल भुगतान का पोल खुल जायेगा। इतना ही नहीं, पैक हाउस कार्यक्रम के किसान श्रीकृष्ण कुमार सिंह ग्राम कोलबजरडीह,वि.ख. सण्डवा चंद्रिका ने शिव फर्नीचर बझान सण्डवा-चंद्रिका,प्रतापगढ़ के बिल पर सीमेंट,सरिया,बालू आदि सामग्री के सापेक्ष 2 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है। जबकि शिव फर्नीचर सीमेंट,बालू सरिया का अधिकृत विक्रेता है ही नहीं? संबंधित तहसील के प्रभारियों के अभिलेख में ये अधिकृत विक्रेता नहीं है,जांच करा ली जाये…। ऐसे अनगिनत फर्म हैं,जिनका जी.एस.टी. में एच.एस.एन. कोड है ही नहीं,उन्हें अनियमित तरीके से भुगतान किया गया है। यदि समस्त अभिलेखों की जांच करा ली जाये तो बड़ा घोटाला उभर कर सामने आ जायेगा।

गोपनीय पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि माइक्रोएरीगेशन वर्ष 2019-20 एवं 2021-22 में सैंकड़ों ऐसे किसान हैं जिनके पास जितनी जमीन है इनके द्वारा दुबारा योजना का लाभ दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी जमीन पर वर्ष 2021-22 के अंतर्गत ड्रिप,मिनिस्प्रिंकलर का भुगतान किया गया है। सैंकड़ों ऐसे भी किसान हैंजिनके पास जितनी जमीन है,उससे कई गुना अधिक जमीन दिखाकर ड्रिप,मिनिस्प्रिंकलर का भुगतान कर दिया गया है। मसलन,छोटेलाल ग्राम बेसार,वि.ख.पट्टी,प्रतापगढ़,अमरनाथ ग्राम गोपालपुर वि.ख.सांगीपुर,प्रतापगढ़,जो अनुसूचित जाति के किसान हैं,को दो हेक्टेयर का कार्यक्रम दिखाकर स.220869 रुपये का भुगतान कर दिया गया है, इनकी खतौनी एवं स्थलीय सत्यापन कर लिया जाये तो पर्दाफाश हो जायेगा। इसी तरह,जयप्रकाश सिंह ग्राम छतरपुर वि.ख. सण्डवा,चंद्रिका,प्रतापगढ़ के एक हेक्टेयर मिनी स्प्रिंकलर को 116166 रुपये के अनुदान का भुगतान कर दिया गया है जबकि श्री सिंह विगत् तीन सालों से उसी जमीन,खतौनी पर कई कार्यक्रम का लाभ उठा रहा है।नियम की बात करें तो एक योजना का लाभी लेने वाले किसान आगामी तीन वर्ष बाद ही योजना का लाभ ले सकते हैं,फिर इन पर इतनी मेहरबानी क्यों ? जांच का विषय है। उक्त योजना के सभी दस्तावेज संबंधित तहसील प्रभारियों से डीबीटी बिल, खतौनी, आवेदन पत्र,रजिस्ट्रेशन की पावती से मिलान करते हुये उनके सापेक्ष कराये गये कार्यक्रमों की जमीनी जांच करा ली जाये तो बड़ा घोटाला उभर कर सामने आ जायेगा। बहरहाल,अनीता देवी द्वारा लगाये गये गंभीर आरोप में शासन में बैठे उद्यान विभाग के अफसरों के होश उड़ा दिये हैं। इस बाबत अनीता देवी ने कहा कि जांच करा ली जाये,सच सामने आ जायेगा। कुण्डा प्रतापगढ़ से भाजपा के जिलाध्यक्ष,युवा मोर्चा मनोज कुमार यादव ने कहा कि मैंने भी उद्यान विभाग में हुये घोटाले का खुलासा कर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। पूरी उम्मीद है कि जीरो टॉलरेंस के पक्षधर मुख्यमंत्री घोटाला करने वालों को बख्शेंगे नहीं।

इसी तरह, पार्ट 2 स्टोरी में 30 जुलाई को शीर्षक भ्रष्ट उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह राणा की कहानी : मैडम की गाड़ी चली नहीं, बिल आया 3 लाख … प्रकाशित किया था। खबर में खुलासा कुुछ इस तरह किया गया था…।मुख्यमंत्री को लिखे गये शिकायती पत्र में अनीता देवी ने आरोप लगाया है कि उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह वर्ष 2021-22 में माइक्रोएरिगेशन योजना में काम दिखाकर 3 लाख रुपये वाहन खर्च में निकाल लिया है। योजना के नाम पर वाहन चलाने के नाम पर प्रति माह स्पीड ट्रवेल्स, हजरतगंज,लखनऊ के नाम पर 44,520 रुपये का बिल बनाकर देती थी।  हकीकत यह है कि सीमा सिंह वाहन का प्रयोग सिर्फ अपने निजी आवास नियर ओझा हॅास्पिटल, टैगोर टाउन प्रयागराज से प्रतापगढ़ के लिये करती थी। यदि लॉग बुक में भरे गये स्थान,तिथि एवं उसके सापेक्ष सत्यापन आदि राजकीय कार्यों की तिथि से मिलान कर लिया जाये तो पता चलेगा कि किस तरह से सीमा सिंह राजकीय धन की लूट कर रही हैं। पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि  सीमा सिंह की पहली तैनाती प्रयागराज में उद्यान निरीक्षक के पद पर हुयी थी। यहीं पर पदोन्नति मिली और बन गयीं वरिष्ठ  उद्यान निरीक्षक, खुशरुबाग, इलाहाबाद। उसके बाद क्लास 2 में पदोन्नति पाकर डॉ. सीमा सिंह बन गयीं अधीक्षक राजकीय उद्यान, इलाहाबाद। मौजूदा समय प्रतापगढ़ में तैनात हैं।

सीधी बात करें तो लगभग 20 वर्ष तक सीमा सिंह इलाहाबाद में ही तैनात थीं और अभी भी प्रयागराज मंडल में ही हैं। आरोप लगाया गया है कि सीमा सिंह की पांच वर्ष के कार्यकाल में माइक्रोएरिगोशन कार्य में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है।  इन्होंने एक ही खतौनी पर परिवार के अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग वर्षों में लाभार्थी बनाकर अनुदान दिया गया है। लाभार्थि किसानों के पास भू-राजस्व अभिलेखों में उनके नाम के आगे अंकित रकबा को कूटरचित तरीकेे से अनुदान की सीमा तक बढ़ाया गया है। नियम की बात करें तो यदि किसी लाभार्थी को योजना का लाभ मिल गया है तो फिर दुबारा उसे 7 साल बाद ही योजना का लाभ मिलेगा लेकिन यहां वर्षों से डॅा. सीमा सिंह अपनी टीम के साथ मिलकर एक ही किसान को फर्जी तरीके से लगातार कई सालों तक योजनाओं का लाभ देती रही हैं। इनके पांच वर्ष के कार्यकाल में माइक्रोएरिगेशन योजना की जांच करा ली जाये तो करोड़ों का घोटाला सामने आयेगा। इसी योजना में यदि सभी जनपदों में उच्च स्तरीय जांच करा ली जाये तो हजारों-करोड़ों का घोटाला निकल कर सामने आयेगा।।  वर्ष 2020-21 के संप्रेक्षण में भी इस प्रकार का प्रकरण उच्च अधिकारियों को बताया गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इससे साबित होता है कि मुख्यालय में बैठे एमडी को भी इनलोगों ने ‘मैनेज’ कर लिया है।

इस पर भारतीय जनता युवा मोर्चा,प्रतापगढ़ के जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार यादव ने कहा कि डॉ. सीमा सिंह ने वाहन चलाने के नाम पर जो तीन लाख का बिल विभाग में दिया है यदि उसकी सच्चाई जाननी है तो सरकारी लॉग बुक से मिलान कर लिया जाये। सच सामने आ जायेगा। इसके अलावा माइक्रोएरिगेशन योजना में इनके द्वारा बनाये गये लाभार्थियों की भूमि की जांच करा ली जाये तो घोटाला हजारों-करोड़ का निकलेगा

जांच अधिकारी भानू प्रकाश राम ने एक हफ्ते के अंदर शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाये गये गंभीर आरोप पर दस्तावेज मांगे तो सीमा राणा की बोलती बंद हो गयी। जांच अधिकारी भानू प्रताप राम उन गिने-चुने अधिकारियों के रुप में जाने जाते हैं,जो निष्पक्ष जांच सौंपने का दम रखते हैं। फिलहाल उनके द्वारा मांगी गयी पत्रावली को सीमा सिंह राणा ने तो नहीं दिया । सवाल यह है कि आखिर निदेशक सीमा राणा के भ्रष्टाचार की कहानी जानने के बाद क्यों बचा रहे हैं ? अधिकारियों के बीच चर्चा है कि निदेशक तो खुद भ्रष्टाचार की खाई में डूबे रहते हैं तो वे भ्रष्टाचार की गगरी से दो बूंद का घोटाला कर ले तो उसके खिलाऊ कैसे कार्रवाई कर सकते हैं। बात जो भी हो,द संडे व्यूज़ का हल्ला बोल जब तक जारी रहेगा जब…

नोट– द संडे व्यूज़ शीघ्र करेगा डॉ. सीमा सिंह राणा पर बड़ा खुलासा। हम बतायेंगे कि सीमा ने किस शातिराना अंदाज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी खजाने में लगा दी सेंध और किसी को भनक तक नहीं लगा। देखते रहिये

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