मुख्यमंत्री ने यूपीडा में ट्रांसफर करने के अगले दिन 17 ट्रांसफर निरस्त करने पर मंत्री नंदी से यूपीडा छिना

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की परखच्चे उड़ाने की भरपूर कोशिश करने वाले मंत्री नंद गोपाल नंदी से आज यूपीडा छिन कर अपने पास रख लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में हुआ यह बदलाव अब सिर्फ विभागीय फेरबदल नहीं माना जा रहा है बल्कि सत्ता के अंदर बढ़ती असहजता,अफसरशाही की नाराजगी और हजारों करोड़ की अंदरुनी लड़ाई के रुप में देखा जा रहा है। चर्चा इस बात की है कि आखिर क्या हो गया कि एक्सप्रेस वे,डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक निवेश की धुरी माने जाने वाले विभाग को मुख्यमंत्री ने नंदी से अलग करना जरुरी समझा। लोकभवन के भरोसेमंद आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि औद्योगिक विकास विभाग के और यूपी सीडा में एक ही दिन में मंत्री नंद गोपाल नंदी द्वारा तबादले किये गये और दूसरे ही दिन 17 अधिकारियों के तबादले निरस्त कर दिये गये। इसकी भनक किसी तरह मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ को लगी, उन्होंने मंत्री नंदी से यूपीडा हटा लिया। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इन तबादलों को लेकर मंत्री नंदी एक ही दिन में अपना फैसला कैसे बदल दिया ? इसके पीछे कमजोर निर्णय है या कुछ और ?

औद्योगिक विकास विभाग के इन तबादलों ने पूरी सरकार और उसके सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है? सीधी बात करें तो ताकतवर मंत्री नंदी को जोर का झटका धीरे से लगा है। प्रदेश में एक्सप्रेस वे बनाने का काम देखने वाला उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यूपीडा की जिम्मेदारी उनके पास से हटा ली गयी है। अब यूपीडा का कामकाज अवस्थापना विभाग को दे दिया गया है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन है। बेहतर कामकाज और तालमेल का आधार बताते हुये इस बाबत सचिवालय प्रशासन की ओर से इसका आदेश जारी कर दिया गया है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि कई अहम परियोजनाओं की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होने लगी है,जिससे मंत्री की भूमिका सीमित होती जा रही थी। ऐसे में विभाग हटाया जाना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं,बल्कि विश्वास में कमी का इशारा माना जा रहा है।
क्या घटना नंदी का कद ?
राजनीतिक हलकों में इसे नंदी के कद में कमी के तौर पर देखा जा रहा है. नंदी प्रयागराज की दक्षिणी सीट से विधायक हैं और योगी सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाते हैं. उनके पास औद्योगिक विकास के साथ निर्यात प्रोत्साहन और एनआरआई जैसे अहम विभाग भी हैं, लेकिन यूपीडा जैसा बड़ा प्रभार छिनना यह संकेत देता है कि सरकार एक्सप्रेस-वे जैसी मेगा परियोजनाओं पर सीधे नियंत्रण रखना चाहती है.

क्या है आदेश में
सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवस्थापना विकास अनुभाग को बड़ी लागत वाली अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए नीति निर्धारण और समन्वय का काम पहले से ही सौंपा गया है. यूपीडा के काम भी इसी दायरे में आते हैं. ऐसे में दो अलग-अलग जगहों पर काम बंटने से देरी हो रही थी. अब एक ही जगह पर सारा काम आने से निर्णय तेजी से होंगे. यूपीडा के हटने के बाद अब नंदी का ध्यान औद्योगिक निवेश और निर्यात बढ़ाने पर रहेगा. वहीं एक्सप्रेस-वे का भविष्य अब सीधे सीएम योगी के हाथ में होगा. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह बदलाव प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं की रफ्तार तय करेगा.









