चुनावी रंग का खुमार :आलमबाग गुरुद्वारे के पास पार्क का शिलान्यास करने पर भू-माफिया महिला ने बृजेश पाठक को ही भू-माफिया बनाया…
पत्रकार वार्ता में पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया,आलमबाग गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारियों ने की कार्रवाई की मांग डिप्टी
सीएम पर आरोप लगाने वाली महिला ही भू-माफिया है: सतवीर सिंह राजू

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। चुनावी रंगत पूरे शबाब पर है। बयानवीरों के तरकश से तीर चलाये जा रहे हैं। सरकार को विपक्ष द्वारा येन-केन प्रकारेण घेरने की भरसक कोशिश जारी है। विपक्ष दूसरों के कंधों का सहारा लेकर घटिया बयानों के तीर चला रहे हैं लेकिन इस बार मामला गंभीर रूख अख्तियार कर लिया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के खिलाफ आलमबाग की रहने वाले एक महिला जगदेई ने आपत्तीजनक भाषा का इस्तेमाल किया। जगदेई ने बृजेश पाठक को आलमबाग गुरुद्वारा के करीब रेलवे की जमीन पर बने पार्क की जगह को अपना बताकर भू-माफिया बताया। वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा मच गया। इसके विरोध में आलमबाग गुरुद्वारा के पदाधिकारियों के साथ पूर्व मेयर डॅा. संयुक्ता भाटिया ने प्रेस कान्फ्रेंस कर विरोध जताया। संयुक्ता भाटिया ने साफ शब्दों में कहा कि जमीन रेलवे की है और वहां से कूड़ा घर हटाकर पार्क बनाया गया है। उस पार्क का उदघाटन डिप्टी सीएम ने किया था। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के नाम का शिलान्यास पत्थर लगा है तो उसे जगदेई महिला भू-माफिया बोल देगी ? डिप्टी सीएम के खिलाफ आपत्तीजनक भाषा का मैं और आलमबाग गुरुद्वारा कमेटी के सभी पदाधिकारियों सहित पूरा सिक्ख समाज विरोध करता है। जगदेई के खिलाफ हमलोग कानूनी कार्रवाई करेंगे।

प्रेस कान्फ्रेंस में सम्बोधित करते हुयेे पूर्व मेयर ने कहा कि ने कहा कि उपलब्ध जानकारी और प्रस्तुत दस्तावेज़ों के अनुसार यह मामला रेलवे और नगर निगम के बीच भूमि उपयोग तथा पार्क निर्माण से संबंधित है। इसमें उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका का कोई प्रमाण उनके संज्ञान में नहीं है। किसी जनप्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाने अथवा उनके विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने से पहले तथ्यों और आधिकारिक अभिलेखों की जाँच आवश्यक है। उन्होंने जगदेई यादव से अपील की कि यदि उनके पास भूमि, पार्क निर्माण या स्वामित्व से संबंधित कोई वैध दस्तावेज़ या दावा है तो उसे प्रशासन, रेलवे, नगर निगम और अन्य सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत करें। विवाद का समाधान व्यक्तिगत आरोपों या सोशल मीडिया टिप्पणियों से नहीं, बल्कि विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया से होना चाहिए।
पूर्व महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने बताया कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित भूमि रेलवे की है और उसका खसरा संख्या 515 बताया गया है। उनके अनुसार, तत्कालीन डीआरएम ने अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया और जनहित तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भूमि को पार्क के रूप में विकसित करने पर विचार किया गया। नगर निगम में संबंधित प्रस्ताव पारित हुआ और रेलवे के डीईएन तथा नगर आयुक्त द्वारा एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद क्षेत्रवासियों की उपस्थिति में शिलान्यास कर विकास कार्य शुरू किया गया। पार्क की चारदीवारी, सड़क और सीवर से संबंधित कुछ कार्य पूरे किए जाने की जानकारी दी गई। इन कार्यों की स्वीकृति और वर्तमान स्थिति का सत्यापन संबंधित विभागों के अभिलेखों से किया जा सकता है।
इसी क्रम में सतबीर सिंह राजू, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, लखनऊ व्यापार मंडल ने कहा कि पार्क निर्माण से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार भूमि रेलवे की बताई गई है और नगर निगम के साथ एमओयू के आधार पर इसे जनहित में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस पूरी प्रक्रिया में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की भूमिका से संबंधित कोई आधिकारिक दस्तावेज़ या प्रमाण सामने नहीं आया है। यदि किसी व्यक्ति को भूमि या पार्क निर्माण को लेकर आपत्ति है, तो वह संबंधित विभागों के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है, लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि के विरुद्ध अपमानजनक और कथित रूप से भ्रामक टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से भी अनुरोध किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित बयानों और आरोपों की तथ्यात्मक जाँच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
श्री राजू ने बताया कि श्री पाठक पर आरोप लगाने वाली महिला जगदेई खुद भू-माफिया है,क्योंकि उसका वश चले तो कह दे कि पूरा आलमबाग उसी का है। प्रतीत होता है कि किसी के बहकावे में आकर वो बे-वजह की बयानबाजी कर रही हैं।
वर्तमान पार्षद गिरीश मिश्रा ने कहा कि भूमि संबंधी किसी भी दावे, आरोप या विवाद का समाधान सरकारी अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड, रेलवे दस्तावेज़ों और न्यायालयीन प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए। बिना प्रमाण किसी जनप्रतिनिधि को विवाद में जोडऩा जनहित में नहीं है और इससे वास्तविक मुद्दा भटकता है।
गुरुद्वारा अध्यक्ष निर्मल सिंह ने बताया कि क्षेत्रवासी लंबे समय से कूड़े, जलभराव, दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या से परेशान थे। बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता था, जबकि सर्दियों में कूड़ा जलाए जाने से धुएँ और प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती थी। बच्चों और स्थानीय नागरिकों को आवागमन में भी कठिनाई होती थी। क्षेत्रवासियों ने तत्कालीन महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया से समस्या के स्थायी समाधान का अनुरोध किया। उनके सहयोग से तत्कालीन डीआरएम से संपर्क कर स्थल निरीक्षण और पार्क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
एडवोकेट सुरेन्द्र सिंह बक्शी ने कहा कि कुछ पक्ष खसरा संख्या 535 से 545 तक का उल्लेख कर रहे हैं, जबकि पार्क के लिए चिन्हित भूमि का खसरा संख्या 515 बताया गया है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों, रेलवे रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेज़ों के मिलान से स्पष्ट होगी। उन्होंने भूमि, एमओयू, पार्क निर्माण और न्यायालयीन स्थिति की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच की मांग की। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के विरुद्ध की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जनप्रतिनिधि की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे बयानों की जाँच कर यह स्पष्ट किया जाए कि वे तथ्यात्मक हैं या भ्रामक। प्रेस वार्ता में राम कुमार वर्मा, प्रेम कृपलानी, बीबी रविन्दर कौर, दिलप्रीत सिंह विर्क, राजेन्द्र सिंह बग्गा लक्की, औंकार सिंह पनेसर, रतपाल सिंह गोल्डी, भूपिन्दर सिंह पिन्दा, इकबाल सिंह, परविन्दर सिंह तथा अनेक क्षेत्रवासियों ने हिस्सा लिया।












