होमगार्ड मुख्यालय :11 मंजिला मल्टी स्टोरी बिल्डिंग अफसर के घूसखोरी में कहीं कब्रगाह ना बन जाये ?
गोपनी पत्र ने मचायी सनसनी, मुख्यालय पर तैनात एक अफसर बिल्डिंग की छत पडऩे से पहले ले रहा है घूस
कार्यदायी संस्था के जेई शमशेर आलम बना वसूली मैन,दो दिन पूर्व अफसर के आवास पर पहुंचायी मोटी रकम
सवाल: जब कार्यदायी संस्था से लिया जायेगा घूस तो क्या निर्माण कार्य सही होगा ?
सवाल: क्या राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने करायी बिल्डिंग मैटेरियल की जांच ?
सवाल: कर्मचारी ही तय करें कि उनके मासूम बच्चे,माता-पिता मजबूत बिल्डिंग में रहेंगे या ?
द संडे व्यूज़ इस मुददे को मुख्यमंत्री स्तर तक ले जायेगा…

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। होमगार्ड मुख्यालय पर बनायी जा रही 11 मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनने के बाद ही उसमें रहने वाले कर्मचारियों का परिवार सुख भोगेगा लेकिन विभागीय मंत्री से लेकर मुख्यालय पर तैनात एक अधिकारी अभी से ही धकाधक राजयोग, धनयोग का सुभ भोग रहे हैं। बिल्डिंग बनाने वाली कार्यदायी संस्था तो मानों उसके लिये कुबेर का खजाना है। एक बिल्डिंग पर छत पड़ी नहीं कि कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज वर्मा और जेई शमशेर आलम से लपक लिया लाखो रुपये…। छ मंजिल बिल्डिंग पड़ चुकी है…। बुझ रहे हैं ना कि साहेब कितना डकार गये होंगे। … लाखो रुपये की वसूली हो चुकी है। चौंकिये मत अब सातवी छत पडऩे वाली है,जिसका उन्होंने … लाख रुपये मांगा गया था। सोचिए,जब किसी ईमारत में घूस की दीमक लग जाती है तो उसकी बुनियाद खोखली ही होती है। जब मुख्यालय पर बैठे अफसर कार्यदायी संस्था से मुंह खोलकर लाखों रुपये मांगेंगे तो स्वाभाविक है कि ठेकेदार घटिया निर्माण करेगा। हकीकत तो ये है कि 11 मंजिला बिल्डिंग में किसी अधिकारी का परिवार नहीं रहेगा… इसमें सिर्फ और सिर्फ क्लास 3 और क्लास 4 के कर्मचारियों का ही परिवार रहेगा…। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे अफसर सिर्फ अपने धन कमाऊ हवस के चक्कर में ये भी नहीं सोच रहें कि यदि आने वाले समय में 11 मंजिले बिल्डिंग में कोई हादसा होता है तो उसके लिये जिम्मेदार कौन होगा ? द संडे व्यूज इस मुहिम को चलाता रहेगा और सिलसिलेवार बतायेगा कि जेई भाईजान किन साहेबों को नोटों की गड्डियों से तर कर रहे हैं और होमगार्ड विभाग के कर्मचारियों के परिजनों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं ? हालांकि द संडे व्यूज डॉटकॉम व इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉटकॉम पैसे के लेन-देन की पुष्टि नहीं करता है।
होमगार्ड मुख्यालय में आफिसर्स मेस के पीछे बन रही 11 मल्टी स्टोरी बिल्डिंग को बनाने का काम कार्यदाई संस्था उ. प्र. राजकीय निर्माण निगम को दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच है कि होमगार्उ विभाग को जब अत्याधुनिक किया जा रहा है तो यहां काम करने वाले सैंकड़ों क्लास थ्री एवं क्लास फोर कर्मचारियों को सरकारी आवास की भी सुविधा दी जाये। इसी के तहत वर्ष 2025 में इस काम की नींव रखी गयी। होमगार्ड राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति ने भूमि पूजन किया और निर्माण कार्य की शुरुआत हो गयी। फिलवक्त 6 मंजिल तक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और 7 वें मंजिल की छत पडऩे वाली है।
बात यहां निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मुख्यालय पर बैठे एक अफसर के घूुसखोरी की हो रही है। मुख्यालय पर दबी जुबान से चर्चा जोरों पर है कि मुख्यालय पर जबसे एक महाभ्रष्टï अफसर की तैनाती हुयी है, हर काम में घूसखोरी चल रही है। आज हम बात करते हैं सिर्फ और सिर्फ मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की…। मुख्यालय से लेकर शासन स्तर पर चर्चा जोरों पर है कि कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज वर्मा और जेई शमशेर आलम पर एक अफसर अपना छत्रराज बताकर लाखों रुपये वसूल चुका है और अभी भी वसूल रहा है। बताया जाता है कि उस अफसर ने प्रोजेक्ट मैनेजर और जेई को झांसे में लेने के लिये धौंस दी कि यहां पर जो मैं चाहुंगा वही होगा…इसलिये …। आलम ये रहा कि जेई भाईजान,जो अफसर को खुश करने के लिये कड़कडुवा नोटों की गड्डी लेकर घर तक पहुंच जाते हैं। अफसर की मांग होती रही कि एक छत पड़े उससे पहले … लाख रुपये पहुंचा जाओ। यानि छह छत पडऩे पर … लाख रुपये भाईजान ने पहुंचा दिया है।
द संडे व्यूज़ डॉट कॉम और इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉटकॉम पैसे के लेन-देन की पुष्टि तो नहीं करती लेकिन धुआं वहीं उठता है,जहां आग लगती है…। खैर,बताया जाता है कि भाईजान ने दो दिन पहले भी साहेब की बड़ी डिमांड को उनके आवास पर जाकर पूरी की। इसकी पुष्टि साहेब के आवास के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज से की जा सकती है।

चलिये पैसे की लेन-देन की बातें बड़े साहेब और भाई जान जानें,इससे द संडे व्यूज़ को क्या लेना-देना लेकिन उन कर्मचारियों से जरुर लेना-देना है,जो बिल्डिंग बनने के बाद यहां पर रहने आयेंगे ? सवाल इसलिये बनता है कि जब कार्यदायी संस्था को आप ईमानदारी से काम नहीं करने देंगें,मोटा कमिशन लेंगे तो क्या वो अपना घर बेचकर मजबूत 11 मंजिला बिल्डिंग खड़ा करेगा? क्या विभाग के मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने इस बात की जांच करायी कि बिल्डिंग निर्माण में मिलायी जा रही सीमेंट,बालू,मौरंग की मात्रा सही हो रही है या नहीं? शासन में बैैठे अलंबरदार अफसरों ने निर्माण कार्य के मैटेरियल की जांच करायी? मैं जानता हूं मंत्री जी ने कोई जहमत नहीं उठायी होगी क्योंकिे कार्यदायी संस्था से निर्धारित कमिशन जब जेब में चला जाता है तो फिर भाड़ में जाये काम…। द संडे व्यूज़ इस मुददे को ऊपरी स्तर से उठायेगा और कर्मचारियों को भी आवाज उठानी होगी क्योंकि कल को बिल्डिंग में उन्हीं के मासूम बच्चों व परिजनों को रहना होगा…। कर्मचारी तय करें कि वे मजबूत बिल्डिंग में रहना चाहेंगे या मौत की दस्तक देती कमजोर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में ?
शेष अगले अंक में…













